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अखिल भारतीय सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति के 15 वे राष्ट्रीय अधिवेशन का बेंगलुरु में हुआ उद्घाटन

कुंवर सैन सागर रिपोर्टर

रूड़की–अखिल भारतीय सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति के 15वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन कर्नाटक प्रांत की राजधानी बेंगलुरु में 25दिसम्बर 2021को हुआ।इस त्रिदिवसीय साहित्य समारोह को ‘ कर्नाटक महोत्सव ‘ के रूप में मनाया गया।इस साहित्य समारोह में उत्तराखण्ड राज्य से हिमालय साहित्य एवं कला परिषद् के विमल बहुगुणा, नीरज नैथानी,डा०प्रकाश चमोली, आरती रावत पुण्डीर, धीरेंद्र रांगण, माधुरी नैथानी,तथा मीनाक्षी चमोली ने प्रतिभाग किया।उत्तराखण्ड राज्य के सात सदस्यीय दल ने कर्नाटक समारोह में लोक संस्कृति,लोक साहित्य तथा लोक गायन की प्रभावशाली प्रस्तुति कर दक्षिण भारतीय प्रांत में पहाड़ी संस्कृति की झलकियों से सहभागियों को परिचित कराया।बेंगलुरु के सुहावने गुलाबी ठंड के मौसम में राजस्थान,उत्तर प्रदेश,दिल्ली,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,हरियाणा,पश्चिम बंगाल,गुजरात आदि अनेक राज्यों से आए साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया।25दिसम्बर को ‘क्रिसमस डे ‘के अवसर पर इस दिव्य भव्य समारोह के उद्घाटन सत्र के आयोजन ने वास्तविक रूप से इस दिवस को बड़े दिन में परिवर्तित कर दिया।प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी,द्वितीय दिवस पर भरत नाट्यम,कन्नड़ प्रार्थना,सरस्वती वंदना,के साथ सम्मान समारोह , राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के साथ ही सुंदर बाग बगीचों की नगरी का फूलों की खुशबू में किया गया पयर्टन आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।तृतीय दिवस पर लॉयन्स क्लब के सभागार में साहित्य साधनक मंच मंच बेंगलुरू के द्वारा आयोजित सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ कर्नाटक महोत्सव का अविस्मर्णीय संपूर्ण संपादन हुआ।प्रतिभागियों को इसके साथ ही बेंगलुरू नगर के ऐतिहासिक व अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ।चतुर्थ दिवस पर मैसूर नगरी में पैलेस,वृंदावन गार्डन,महल,चामुण्डा मंदिर,ब्रिटिश कालीन केथेडरल चर्च,पोंगा नदी का बांध,बाग बगीचे,फुलवारी ,नारियल वृक्ष,सुपारी के पतले,लम्बे,व ऊंचे वृक्षों की हरी भरी कतारों का दृश्यावलोकन करने के साथ इस साहित्यिक पयर्टन शिविर का मनभावन समापन हुआ।कहना अतिश्योक्ति ना होगा कि कर्नाटक महोत्सव से समस्त प्रतिभागी सुखद अनुभूतियां प्रदान करने वाली मधुर स्मृतियों साथ लेकर अपने गृह स्थान सकुशल लौटे हैं।बंगलौर के स्थानीय संयोजक ज्ञान चंद मर्मज्ञ, राही राज, प्रीति,अखिल भारतीय सर्व भाषा समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव , मिश्रा तथा संस्था के समर्पित सदस्यों के सहयोग से संपूर्ण आयोजन समग्र रूप से सफल रहा।

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