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हरिद्वार में उत्तराखंड क्रांति दल ने की प्रेस वार्ता

आज दिनांक 20 सितम्बर 2021 को उत्तराखंड क्रांति दल केंद्रीय अध्यक्ष ने प्रेस क्ल्ब हरिद्वार में प्रेस वार्ता के
सम्बोधन में कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल की मुख्य अवधारणा उत्तराखण्ड राज्य में सत्ता और शासन का विकेंद्रीकरण करके सरकार व शासन को जनता के नजदीक से नजदीक लाना है ताकि जनता बिचौलियों द्वारा ठगी नहीं जाये अर्थात जनता को योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचे।

भूकानून को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल का नजरिया एकदम साफ है कि उत्तराखण्ड में सरकार बनाते ही पहला कदम यह होगा कि किसानों की जोत की भूमि किसी प्रकार से भूमाफिया के कब्जे में नही जाने दिया जायेगा जिसके लिये हर सम्भव प्रयास किया जायेगा।

केंद्रीय दल या अन्य राज्यों से संचालित राजनैतिक दल उत्तराखण्ड की भूमि पर गिद्द दृश्टि जमाये हुए हैं और बगुले की तरह यहां भौगोलिक सम्पदा को हडपने की फिराक में हैं इसीलिये उत्तराखण्ड की भोली भाली जनता को बहला फुसला कर सत्तारूड होना चाहते हैं।

पिछले 20 वर्षों से बारी बारी से उत्तराखंड राज्य में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें रही हैं इन दोनों ही सरकारों ने प्रदेश की जनता को गुमराह कर उत्तराखंड राज्य को बारी-बारी से लूटने का काम किया है अब एक और दिल्ली का दल अपने पैर पसारने में लगा है। परन्तु अब उत्तराखण्ड की जनता बहकने वाली नहीं है।

उत्तराखंड क्रांति दल के वीर सिपाहियों की शहादतों से प्रदेश का निर्माण हुआ जिन सपनों को लेकर वह लोग आगे बढ़े थे वे एक बीती बात होती नज़र आ रही है क्योंकि भाजपा व कांग्रेस की सरकारों ने अपने वित्तीय सहायकों को लाभ पहुंचाने के सिवा कुछ नही किया है जिसके कारण पहाड़ या मैदान से उत्तराखण्ड की जवानी व बौद्धिक शक्ति का पलायन ही हुआ। उत्तराखण्ड में स्थापित उद्धोगों में उत्तराखण्ड के बेराजगार युवाओं की जगह अन्य प्रदेशों के युवाओं को रोज़गार देना भी एक षडयंत्र है ताकि वोट बैंक पक्का किया जाये क्योंकि उत्तराखण्डी युवा उक्रांद के साथ खडा होने लगा है।

उत्तराखंड क्रांति दल से लोगों द्वारा विरोधी दल पूछवा रहे हैं कि उक्रांद को सत्ता देने के लिये वोट क्यों किया जाय? ये तो राजनीति करना ही नहीं जानते हम यह बताना चाहते हैं कि उत्तराखण्ड राज्य की लडाई ही एक राजनैतिक लडाई थी जिसको उत्तराखंड क्रांति दल ने बखूबी जीता और आज हमारी पहचान उत्तराखण्डी है।

उत्तराखंड क्रांति दल आगामी हरिद्वार में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2021 में अवश्य भाग लेगा और विधांसभा चुनाव 2022 में समस्त विधांसभा सीटों अपने प्रत्याशी उतारेगा।

2022 में जनता ने उत्तराखंड क्रांति दल की सरकार बनायी और हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में उक्रांद समर्थित प्रत्याशियों को विजयश्री दिलाई तो यह निश्चित है कि :
– उत्तराखण्ड में बिजली की कीमत ऐसी होगी कि ऐसा लगेगा कि जैसे बिजली 500 यूनिट से ज्यादा मुफ्त है।
– उत्तराखण्ड मे स्थापित उध्योगों में 80 प्रतिशत उत्तराखण्डी बेरोज़गारों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मिलेगा।
– समुचित चिकित्सा सुविधा 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में होगी जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
– शिक्षा का अधिकार योजना के तहद शिक्षा की व्यवस्था सरकार की जिम्मेदारी होगी।
– छात्रों को अपने विद्धालय तक जाने के लिये बस का किराया नहीं देना होगा।
– राज्यीय सरकारी नौकरियों में केवल उत्तराखण्डी को ही नौकरी दी जायेगी जिससे लगभग हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को राज्य सरकार के विभागों एवं उपक्रमों में नौकरी मिल जायेगी।
– पर्यटन व ट्रान्सपोर्ट उधमियों को अपने व्यापार को विकसित करने के लिये अनेक सुविधाएं सरकार देगी।
– उत्तराखण्ड के विकास के मुख्य पहिये को चलाने के लिये होने वाले व्यय को कम करने के लिये प्रदेश मे पेट्रोल व डीज़ल की कीमतों को अन्य राज्यों की तुलना में कम रख वायेगी।
– उत्तराखण्ड में सुनियोजित विकास योजनाओं को पटरी पर रखने के लिये योजनाओं का नियोजन स्थानीय आवश्यक्ताओं और परिस्थितियों के अनुरूप होगा।
– कृषि पैदावार का मूल्य सरकार किसान के साथ सहकारी प्रणाली के अनुसार तय करेगी ताकि किसान को उसकी पैदावार का समुचित मूल्य मिले यह तभी होगा जब फसल का मूल्यांकन खलिहान में पहुंचने पर किया जाये। साथ ही सरकार हर सम्भव सुविधाएं मुहय्या भी करायेगी।
– हर उत्तराखण्डी का जल-जंगल-जमीन पर उसके अपने प्रयोग हेतु हक होगा।
– जिन भी उत्तराखण्डी परिसम्पत्तियों पर उत्तर प्रदेश ने अपने कब्जे में कर रखा है उन्हे वापिस लिया जायेगा।

उत्तराखंड क्रांति दल अध्यक्ष ने कहा कि यह तो केवल ट्रेलर मात्र है जिसमें हमने बहुत कुछ साफ किया है कि उक्रांद ने राज्य आंदोलन इन्ही कुछ कारणों की वजह से अलग राजनैतिक पहचान व विकास, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा व इस मध्य हिमालय के पिछडे हुए क्षेत्र को संवारने के लिये किया था। 1996 जनवरी में उत्तराखंड क्रांति दल के साथ तत्कालीन सरकार ने केंद्र्शासित उत्तराखण्ड प्रदेश बनाने का वादा किया था जिसे 2000 में विधानसभाई प्रदेश बना कर कूट्नीति के चक्रव्यूह में फंसा दिया जिस कारण उत्तराखण्ड आज अरबों रुपयों का कर्जदार बन गया जिसका मुख्य कारण प्रदेश हित नहीं पार्टी व वित्त सह्योगियों को लाभ पहुंचाना।

प्रेस वार्ता में उत्तराखंड क्रांति दल अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी के साथ उक्रांद संरक्षक मंडल सदस्य डा. नारयण सिंह जंतवाल, केन्द्रीय सर्वोच्च सलाहाकर समिति सद्स्य रवींद्र वशिष्ठ, केंद्रीय उपाध्यक्ष सरिता पुरोहित व चौधरी बृजवीर सिंह, जिलाध्यक्ष बल सिह सैनी, केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य डा. राजवीर सिंह पुण्डीर, जिला उपाध्यक्ष संजय उपाध्याय, प्रदीप उपाध्याय, जिला महामंत्री विजय भारद्वाज, शह्ज़ाद अली, तरूण जोशी, सूरज वर्मा प्रताप चौधरी, कोषाध्यक्ष व कार्यालय प्रभारी रजत शर्मा, जिला संगठन मंत्री श्रीमति प्रियंका शर्मा, डा. ज्ञानवीर सिंह एड्वोकेट, आदि लोग मौजूद रहे

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